शनिवार, मई 07, 2005

दिन आ गये शबाब के आँचल सँभालिये

दिन आ गये शबाब के आँचल सँभालिये -2
होने लगी है शेहर में हलचल सँभालिये
दिन आ गये शबाब के आँचल सँभालिये

चलिये सँभल -2 के कठिन राहे-इश्क है -2
नाज़ुक बड़ी आपकी पायल सम्भालिये
दिन आ गये शबाब के आँचल सँभालिये

सजधज के आप.. निकले सरे...राहे खैर हो-2
टकरा न जाये आपका पागल सम्हलिये
दिन आ गये शबाब के आँचल सँभालिये

घर से ना जाओ दूर किसी अजनबी के साथ -2
बरसेगा जोरशोर से.. बादल सम्भलिये
दिन आ गये शबाब के आँचल सँभालिये
होने लगी है शेहर में हलचल सँभालिये
दिन आ गये शबाब के आँचल सँभालिये





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