कोई ये कैसे बताये कि
कोई ये कैसे बताये कि वो तन्हा क्यूँ हैं..
वो जो अपना था और किसी का क्यूँ हैं..
यही दुनिया हैं तो ऐसी ये.. दुनिया क्यूँ है..
यही होता है तो आखिर यही होता क्यूँ है,
इक जरा हाथ बढा दे तो पकkड ले दामन
उसके सीने मे समा जाये हमारी धडकन
इतनी कुरबत है तो फिर फासला इतना क्यूँ है
दिले-बर्बाद से निकला नही अबतक कोई
एक लूटे घर पे दिया करता है दस्तक कोई
आस जो टूट गई फिर से बधाँता क्यूँ हो
तुम मस्सरत का कहो या इसे गम का रिश्ता
कह्ते है प्यार का रिश्ता है जनम का रिश्ता
है जनम का जो ये रिश्ता तो बदलता क्यूँ है
वो जो अपना था और किसी का क्यूँ हैं..
यही दुनिया हैं तो ऐसी ये.. दुनिया क्यूँ है..
यही होता है तो आखिर यही होता क्यूँ है,
इक जरा हाथ बढा दे तो पकkड ले दामन
उसके सीने मे समा जाये हमारी धडकन
इतनी कुरबत है तो फिर फासला इतना क्यूँ है
दिले-बर्बाद से निकला नही अबतक कोई
एक लूटे घर पे दिया करता है दस्तक कोई
आस जो टूट गई फिर से बधाँता क्यूँ हो
तुम मस्सरत का कहो या इसे गम का रिश्ता
कह्ते है प्यार का रिश्ता है जनम का रिश्ता
है जनम का जो ये रिश्ता तो बदलता क्यूँ है

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